Thursday, 8 December 2016

डिजिटल अर्थव्यवस्था केवल अमीरों को पसन्द है, आम जनता के हित में नहीं - डा॰ वंदना शिवा

भारत में ३६ वाँ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला,प्रगति मैदान, दिल्ली में डिजिटल ईन्डिया पविलियन का एक दृश्य (चित्र पीटीआई)

भारत की खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता के बचाव को अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य बनाने से पहले डा॰वन्दना शिवा ने भौतिक विज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने कई किताबें लिखी हैं और उनके काम के लिये उन्हें कई बार पुरस्कृत किया गया है । 

http://www.asianage.com/opinion/columnists/301116/cash-is-pro-people-only-rich-love-digital.html 

लोगों की अर्थव्यवस्था की सबसे शुद्ध मुद्रा है जीवन, स्नेह, ऐक्य और विश्वास

जब से कॉर्पोरेशनों का जन्म हुआ - सामुहिक ईस्ट इन्डिया कंपनी उनका सबसे पहला रूप था - तब से कॉर्पोरेशनों के जरिये मानवजाति पर राज करने वालों ने पृथ्वी और इन्सानों से धन कमाने के नये नये तरीके निकाले हैं और दोनों को ही गरीब बनाते चले गये हैं ।

Thursday, 1 December 2016

पूंजीवाद


तड़प रही है धरती गुलामी की जंजीरों मे 
कट रहीं हैं धमनियाँ, तन घायल
हो रहे हैं जैसे उसपर वार लगातार
खौफ कुछ इस कदर बढने लगा है  ...
स्वच्छंद हवा भी छुप-छुप कर बहने लगी है
कि कैद न कर डालें उसे भी कहीं
जैसे बंदी बना डाला निर्बाध जल को बोतलों में
और उपादानों को देकर बिकाऊ वस्तुओं का आकार
कुछ इस तरह बेचते हैं भरे बाजार
मानो हो गुलामों का व्यापार |

Little old lady in the park

l 17.10.2017 Yesterday while walking my dog in the park nearby I overtook a little old lady. She muttered something and I slow...