Sunday, 7 September 2014

बीटी बैगन बांग्लादेश में विफल किसानों ने क्षतिपूरण की माँग की

 


Bt brinjal: Stunted in India, to grow in Bangladesh

चित्र यहाँ से - http://greenwatchbd.com


१ सितम्बर २०१४

जिन किसानों को बीटी बैगन के पौधे दिये गये थे उन्होंने रविवार को यह कहकर मुआवजे की माँग की कि बीटी बैगन की खेती करने से उन्हें भारी नुकसान हुआ है ।ढाका रिपोर्टर्स के सम्मेलन में उन्होंने यह आरोप लगाया कि बांग्लादेश रिसर्च इन्स्टिटयूट ने उन्हें मूर्ख बनाया है । जीएम बीटी बैगन की खेती के लिए उनका गिनी पिग की तरह इस्तेमाल किया गया है और उनकी जो हानि हुई उसकी पूर्ति नहीं की गई है ।

यूएसएड परियोजना के तहत इस संस्था ने बीटी बैगन जो कि अमरीकी बीज कम्पनी मोन्सेन्टो और भारतीय सहबद्ध महिको की सम्पत्ति है किसानों को यह कहकर बाँटा कि यह ऊँची उपज की नस्ल है और इसमे फल और टहनी में सुराख करने वाली बीमारी कम होती है ।

२२ जनवरी को कृषि मंत्री मतिया चौधरी ने बीटी बैगन के पौधे गाजीपुर, जमालपुर, शेरपुर , रंगपुर और पाबना के २० किसानों को दिये । इनमें से केवल एक खेत को सफलता मिली जबकि १३ पूरी तरह से बरबाद हो गये और ६ आंशिक रूप से बर्बाद हुए जैसा कि संवाददाता सम्मेलन के आयोजकों ने कहा ।

प्रेस कान्फरेन्स में गाजीपुर, जमालपुर और शेरपुर के बीटी बैगन की खेती करने वाले किसान उपस्थित थे।  आयोजकों ने कहा कि संस्था के अधिकारियों और सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों ने रंगपुर और पाबना के किसानों को सम्मेलन में भाग लेने से रोक दिया ।

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