Wednesday, 25 October 2017

Little old lady in the park

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17.10.2017
Yesterday while walking my dog in the park nearby I overtook a little old lady. She muttered something and I slowed down to listen to what she was saying. `A storm is brewing far away', she said ,`don't be out too long.' 
I asked her how she knew that. She pointed to the sky.`Look at the color', she said. Then she pulled out a tiny handkerchief. It fluttered in the wind.`The wind is stronger now', she went on. I forgot all about my walk and listened to the little walking-talking weather station in wonder. She mentioned half a dozen signs she had picked up. I had noticed just two. 
`See, the earthworms ..' she started again, then halted and said with a twinkle in her eyes,` Surprised how I know so much? We didn't have the idiot box (tv) back then, nor the weather forecaster. We had to learn everything. I can teach you.' 

Tuesday, 3 October 2017

A look at the Rohingya Crisis

American plan for South Asian “Kosovo” in Rohingyaland 

Andrew Korybo

Part I  
As complex as it may appear at times, the main consistency of US foreign policy is that it covers its pursuit of geopolitical self-interest with humanitarian and democratic rhetoric. There’s always an ulterior motive behind the US lecturing countries about ‘human rights’ and ‘democracy’, and those two key words should raise immediate red flags to any concerned decision makers in the targeted state that the US is addressing. Being the expert image manipulator that it is, the US never shies away from exploiting human tragedy for its own strategic ends, a lesson that everyone would do well remembering when considering the Rohingya issue in Myanmar. While there certainly are some legitimate grievances that the Rohingya are leveling against the authorities, it’s evident that the US is already exploiting them for its own geopolitical ends. Washington wants to establish a military presence in the Bay of Bengal in order to control China’s pipelines through Myanmar (both of which go through Rohingya-inhabited Rakhine State), but in order to get to that point, it first needs for the Rohingya to have their own autonomous or independent government there.

Sunday, 12 March 2017

मुक्त व्यापार - कॉर्पोरेट धोखेबाजी के लिए एक नेक चेहरा



भारत की खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता के बचाव को अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य बनाने से पहले डॉ वन्दना शिवा ने भौतिक विज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त की |उन्होंने कई किताबें लिखी हैं और उनके काम के लिये उन्हें कई बार पुरस्कृत किया गया है |

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प्रसंस्कृत, अस्वास्थ्यकर खाद्य (जंक फूड) और रोग के बीच के गहरे रिश्ते के बारे ठोस जानकारी होने के बावजूद भी जंक फूड उद्योग को सरकार द्वारा आर्थिक सहायता दी जा रही है जबकि हमारे स्वस्थ खाद्य प्रणाली को कानूनों की सहायता से, या वाशिंगटन से प्रेरित "नकदी पर युद्ध" या नोटबंदी द्वारा प्रतिबंधित किया जा रहा है ।

"स्वतंत्रता" - यह शब्द अब इतना विवादास्पद बन गया है। जब हमलोग जनता के रूप में स्वतंत्रता शब्द का उपयोग करते हैं तो उसका मतलब होता है लोगों के लिए आजीविका कमाने की स्वतंत्रता, ताकि भोजन, पानी, बीज, भूमि, स्वास्थ्य, शिक्षा, ज्ञान, काम, रचनात्मकता, संचार, आदि जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों का उपयोग संभव हो सके जो हमारी जिन्दगी के लिये जरूरी हैं ।

Friday, 10 March 2017

Kindness

Kindness is the language which the deaf can hear and the blind can see -Mark Twain

@ramblingsloa on twitter

Monday, 23 January 2017

डिजिटल तानाशाही से सावधान

"नकदी प्रतिबंध" के माध्यम से डिजिटल अर्थव्यवस्था जबरन लागू करना दुनिया के अरबपतियों द्वारा तकनीकी तानाशाही का एक रूप है
भारत की खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता के बचाव को अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य बनाने से पहले डॉ वन्दना शिवा ने भौतिक विज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त की |उन्होंने कई किताबें लिखी हैं और उनके काम के लिये उन्हें कई बार पुरस्कृत किया गया है |
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2017 की शुरुवात के साथ हमारे लिये यह जरूरी हो गया है कि पूरे भारतवर्ष में रातों रात डिजिटल अर्थव्यवस्था लाने की होड़ में हम भारतवासी गिरते -पड़ते जो जिन्दगी जी रहे हैं, उससे कुछ पल के लिये थमकर यह सोंचें कि यह डिजिटल इकॉनॉमी क्या है, किसके नियंत्रण में है ,पश्चिम द्वारा पेटेन्ट किये गये मगर खुद पश्चिम देशों के लोगों के लिये भी हानिकारक सिद्ध हो रहे इस मुद्रा प्रणाली और टेक्नॉलजी के बुनियादी सिद्धान्तों को समझें जो हमारी जिन्दगी और स्वतन्त्रता को एक खास रूप और दिशा में ले जा रही हैं । हमारे विशाल देश और विविधता से परिपूर्ण उसकी प्राचीन सभ्यता को ये अप्रचलित सिस्टम अपने संकीर्ण सांचे में ढालकर हमारे काम करने के तरीकों को, हमारे जीवन की असंख्य खुशियों को संकुचित कर रहा है ।

Little old lady in the park

l 17.10.2017 Yesterday while walking my dog in the park nearby I overtook a little old lady. She muttered something and I slow...